
जिंदगी का फलसफा भी कितना अजीब है यारों पूरा जीवन सफर और सफर में कट जाता है फिर भी सफर अधूरा – अधूरा सा लगता है…
जिंदगी में कुछ ऐसे मीठी घटनाएं हो जाती है जिन्हें याद करना और दूसरे को बताने के सिवा और कोई दूसरा ऑप्शन नहीं रह जाता है बात उन दिनों की है जब मै इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन का कोर्स कर रहा था और पार्ट टाइम में कॉम्पिटिशन की तैयारी|एक दिन मैं दोस्तो के साथ बैठा था तभी मेरे फोन पर टिंग टाँग मैसेज की रिंग बजा मैंने देखा तो मेरा इंटेलिजेंस ब्यूरो की परीक्षा डेट आगया था दोस्तो को बताया तो उन्होंने एक्जाम अच्छा कर के आने को कहा और मै दो दिन पहले ही एक्जाम सेंटर के लिए निकलने की तैयारी करने लगा क्यों कि सेंटर राजस्थान के जयपुर शहर में था|मै पूरी तैयारी कर इलाहाबाद जंक्शन पर पहुचा ट्रेन रात 11:30 बजे जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस थी स्टेशन पर मैं बैठा था और ट्रेन आने की समय हो चला था तभी मेरे मन में एक खुरापाती आइडिया आया क्यों न बिना टिकट के यात्रा करू और फिर मैंने वैसा ही किया 10₹ का स्टेशन टिकट ले कर ट्रेन के जनरल बोगी में किसी तरह बैठ गया|
भारत के ट्रेनों में जनरल बोगी की हालत किसी छोटे बच्चे के उलझे हुए बालों में जूं खोजने के बराबर है ऎसा लगता है कि भारत की आधी जनसंख्या एक साथ जनरल बोगी में यात्रा करने पर आमत हो गई हो |ऎसा भीड़ देख मेरा तो सर चकराने लगा पर इतने उलझनों के बीच भी एक सज्जन व्यक्ति आँख बंद किए चेहरे पर हल्की मुस्कान के साथ किसी के यादों में खोया था मैं ये देख हैरान था और मैं इस राज को जानने को उत्सुक था पर पूछे तो पूछे कैसे आखिरकार फतेपुर पहुंचते पहुचते मैंने पूछ ही लिया तो उसने हंसते हुए बताया हाँ _मै अपने बीते दिनों को याद कर रहा था उसने जो कहानी बताई सच में रोमांचित कर देने वाली थी मै अपने तरीके से उस कहानी को पेश करता हूं… |
ये कहानी बनारस की एक लड़की (सुमन) की है जो पड़ोस के ही एक लड़के (विवेक) से प्रेम करती है जो एक सरकारी कर्मचारी हैं दोनों एक दूसरे को पसंद करते हैं शादी करना चाहते हैं विवेक थोड़ा चापलूस और खुद के कार्यो में व्यस्त रहने वाला टाइप का इंसान हैं सुमन को कभी कभी इसका व्यवहार बहुत अजीब लगता है पर वह उससे प्यार करती है सोचती शादी हो जाने पर वह सुधर जायेगा|विवेक सुमन को एक दिन रेस्तरां में डिनर के लिए बुलता है और सरप्राइज गिफ्ट में उसे कान की बाली देता है सुमन थोड़ा अपसेट हुई उसे लगा कि विवेक उसे शादी करने का प्रपोजल देगा|तभी विवेक के ऑफिस से जरूरी कॉल आ जाता है और चला जाता है सुमन वही बैठी उसके बारे में सोच रही है तभी सुमन का फोन बजता है
सुमन – हैलो
विवेक _ जानू मुझे ऑफिस के काम से जयपुर जाना पड़ेगा
सुमन _ कितने दिनों के लिए जा रहे हो
विवेक _ पंद्रह दिनों के लिए
विवेक जयपुर चला जाता है इधर सुमन उसके यादों में दिन भर खोई रहती हैं
तेरे बिना मैं ऎसे जिये जा रही हूँ
जैसे कोई गुनाह किये जा रही हूँ ||
तभी सुमन सोचती है कही ऎसा तो नहीं कि वह मुझसे शादी के बारे में बात करने में डरता हो क्यो न मैं ही उसे जयपुर जा कर उसे सरप्राइज करू और शादी करने के लिए कहूँ |सुमन समान पैक कर जयपुर के लिए ट्रेन से निकलती हैं ट्रेन इलाहाबाद जंक्शन पहुचती है सुमन खाने का सामान लेने ट्रेन से उतरती है स्टेशन से बाहर आती है और सामान लेती है तभी ट्रेन का हॉर्न बजता है वह दौडती है पर ट्रेन जा चुकी होती है और जयपुर के लिए वह आखरी ट्रेन थी और जाना जरूरी था स्टेशन के पास ही शुक्ला ट्रेवल एजेंसी है सुमन वहा जाकर जयपुर के लिए टैक्सी रिजर्व करती है ड्राइवर (हेमंत) एक बहुत ही सीधा और सुंदर स्मार्ट लड़का है उसकी मासूमियत भरे चेहरे और आँखों से लगता है मानों वर्षों से किसी के इंतजार मे तड़प रही हो|हेमंत गाड़ी लेकर आता है दोनों एक दूसरे को देखते रह जाते हैं मानो हजारों वर्षों से एक दूसरे को जानते हो लेकिन ये पल कुछ ही समय के लिए था
सुमन _गाड़ी देख कहती है ये गाड़ी तो अपनी आखिरी सांसे ले रही है ये जयपुर तक पहुंच पायेगी
हेमंत _हंसते हुए कहता बूढे इंसानों के केवल शरीर बूढ़ी होती है उनकी इरादे और हौसले नही दोनों हंसी मजाक के साथ जा रहे होते हैं तभी उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है और एसे जगह होता है जहां दूर दूर तक किसी इंसान का नामो निशान नही होता है इनके साथ ऎसा होना एक अजीब बात है मानो कुदरत खुद चाहता हो की ये एक दूसरे के नजदीक आए|पैदल चलते वक्त सुमन अपने बॉयफ्रेंड के बारे में हेमंत को बताती हैं की वह विवेक को प्रपोज करने जा रही है शादी करने के लिए, हेमंत जोर से हँसता है और कहता है कि क्या शादी, शादी की बात विवेक ने की तुमसे
सुमन _नहीं
हेमंत _तब तो तुम गई काम से वो शादी तुमसे करना नही चाहता और तुम उसे शादी करने के लिए फसा रही हो
सुमन _तुम चुप रहो हम एक दूसरे से प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैंतभी एक घर दिखता है वहा जाकर मदद मांगते हैं घर का मलिक बोलता है कि कल सुबह पास के बस स्टैंड से एक बस जाती है वहां से जा सकते हो अगर तुम लोग रात को यहां रुकना चाहो तो रुक सकते हो सुबह चले जाना दोनों वही रात को रोकने की प्लानिंग करते हैं मकान मालिक उन्हें रूम दिखाता है और खाने के लिए पूछता है क्या खाओगे तब वो दोनों कहते हैं कि अगर आप बुरा न माने तो रात खाना हम अपने हाथों से बनाए
मकान मालिक _ आप लोग हमारे मेहमान हैं मेहमानों से काम नहीं करवाते
हेमंत _ चाचा जी आप ने रात को हमे इस अनजाने शहर में रुकने दिया यही बहुत है खाना तो हमी बनाएँगे बस आप बता दी जिए बाजार कहा लगता है यहाँ पर
सुमन और हेमंत दोनों पास के ही गांव के बाजार में जाते हैं| डूबते सूरज की रोशनी में गांव की इतिहास की गुनगुने यादों की ठंडी सांसो की आवाज में जब किसान दिल के लहरों से उठी आवाज से चिल्लाता है बैगन ले लो कद्दू ले लो दस रुपए में दो किलो गाजर – दस रुपए में दो किलो गाजर वह एक अद्भुत पल होता है|इंसानो के प्रति कुदरत की यह ममतामई कल्पना अद्भुत है सुमन को गांव के इस रंग को देख कर इतनी खुशी मिली मानो यह इसकी पहली और आखिरी खुशी हो|हेमंत सुमन को इतना खुश देख उसे एक टक देखता रहा सुमन भी उसे एक टक देखती रही मानो दोनों आंखो आंखो से अपने दिल के दर्द को एक दूसरे को बता रहे हो तभी पास के एक दुकान पर रेडियो पर गाना बजता है
‘इश्क जब एक तरफ हो तो सजा देता है इश्क जब दोनों तरफ हो तब मज़ा देता है
“तभी एक व्यक्ति कहता है भईया थोड़ा बगल(साइड) हो जाइये तब दोनों अपने सपनों से बाहर आते हैं सुमन कहती हैं हम लोग लेट हो रहे हैं जल्दी चलना चाहिए
हेमंत _है चाचा जी हमारी राह देख रहे होंगे
खाना बनता है सब खाते हैं| सुबह जयपुर निकलने के लिए बस स्टैंड जाते हैं बस आती है सुमन कहती हैं अब यहां तक आए ही हो तो जयपुर तक मेरे साथ चलो तभी मैं तुम्हारे टैक्सी का पैसा दूँगी सुमन विवेक को फोन कर जयपुर बस स्टैंड आने के लिए कहती हैं जयपुर पहुंचने पर सुमन को अब कोई खुशी नहीं होती दोनों एक दूसरे को बस देखे जा रहे थे तभी विवेक आता है सुमन तुम यहाँ मुझे तो सरप्राइज कर दी
सुमन _ हाँ
सुमन के चेहरे पर बनावटी मुस्कान साफ दिख रहा था अब वह खुशी नही थी जो घर से निकलने के पहले था सुमन हेमंत का परिचय करवाती है विवेक से और कहती हैं इन्होने मेरी बहुत मदद की |विवेक हेमंत का शुक्रिया अदा करता है सुमन की मदद के लिये फिर विवेक सुमन बात करने लगते हैं दोनों को बात करते देख हेमंत के दिल में एक अजीब से दर्द उठा सुमन को साथ ले कर कही दूर चला जाए पर यह संभव नहीं है हेमंत टैक्सी का पैसा लिए वगैर इलाहाबाद के लिए निकल देता है| हेमंत को इस तरह चले जाना, सुमन को बहुत तकलीफ होता है|विवेक और सुमन रूम पर जाते हैं, सुमन का इस तरह आना और शादी के लिए कहना विवेक को अच्छा नहीं लगता वह शक के निगाहों से देखता है और अपने कार्यो को ज्यादा अहमियत देता है शादी के लिए मना कर देता है सुमन को इसकी बात थोड़ी अजीब लगी पर सुमन भी ऎसे इंसान से शादी नहीं करना चाहती है जो प्रेम के बजाए आपने काम को अधिक अहमियत दे|सुमन वहां से चली जाती है
हेमंत ट्रैवल एजेंसी के ऑफिस में बैठा है रेडियो पर मुहमद हुसैन साहब का गाना बज रहा है
‘दो जवां दिलों का गम दूरियां समझती है कौन याद करता है हिचकियां समझती है|
हेमंत जबसे जयपुर से आया है रातो की नीद और दिन की चैन उड़े हुए हैं किसी से बात नहीं करता है हमेशा गुमसुम बैठा रहता है मानों कोई चीज खो गई हो|तभी बाहर से एक आवाज आती हेमंत भाईय हेमंत भाईय
हेमंत _ काहे चिल्लाये जा रहे हो बे
छोटा लड़का _बाहर कोई आया है आप को दूढ़ रहा हैं
हेमंत _दूढ़ रहा है मुझे कोइन है बे
हेमंत अचंभित था उसे अपने आखों पर विश्वास नहीं हो रहा था सामने सुमन खड़ी थी|सुमन _बाहर से ही हेमंत मुझसे शादी करोगे सुमन _हंसते हुए जल्दी बताओ नही तो मेरी ट्रेन छूट जायेगी तो फिर तुम्हें छोड़ना पड़ेगा
हेमंत _ क्या हकलाते हुए हाँ हाँ नहीं हाँ हाँ
दोनों एक दूसरे को गले लगा लेते मानो बहुत दिनों के बाद मिले हो|हेमंत सुमन को इलाहाबाद का सनसेट दिखाने के लिए ले जाता है और फ़िल्मी स्टाइल में गुटनो पर बैठ कर सुमन को शादी के लिए प्रपोज करता है..
… 🚶♂️…