शिक्षा में सुधार की जरूरत

भारत संपूर्ण विश्व में सबसे युवा देश है और यही युवा ही देश के अमूल्य संसाधन हैं|इतना युवा देश होने के बाद भी देश का विकास सही मायने में अवतरीत नहीं हो पा रहा है|अगर इन युवाओं को देश के विकास की मुख्य धारा से जोड़ना है तो कहीं न कहीं सबसे पहले इनके खुद के विकास पर ध्यान देना होगा क्योंकि वैशाखी पर खड़ा इंसान किसी दूसरे को चलने का सहारा नहीं दे सकता है|युवा को वैशाखी से मुक्त करने में हमारे देश की शिक्षा पद्धति अहम अभिनय निभा सकती है|युवाओं को केवल ऎसे शिक्षा देने से देश का ज्यादा भला होने वाला नहीं है जिसमें वो पढ़कर डिग्री लेकर शिक्षित कहलाए और नौकरी लेने के चक्कर में अपनी इस युवा शक्ति को कई वर्षों तक बर्बाद करते रहे|अब ऎसा क्यों होता है कि नौकरी लेने में इतना समय क्यों लग जाता है |इसका कारण यह उभर कर सामने आया कि जो हमारे रोजगार देने के प्रणाली है बहुत ज्यादा जिम्मेदार नहीं हैं नौकरी देने में ये प्रणाली कई वर्ष लगा देती है जिसमे न सिर्फ इससे युवाओं का समय बर्बाद होता है बल्कि देश के विकास की प्रक्रिया भी लम्बी होती चली जाती है…?

फ़िल्म रिव्यू: कलंक

फ़िल्म : कलंक

निर्देशक : अभिषेक वर्मन

निर्माता : करण जौहर, साजिद नाडियाडवाला, यश जौहर, अपूर्वा मेहता

कास्ट अभिनेता : माधुरी दीक्षित, सोनाक्षी सिन्हा, आलिया भट्ट, वरुण धवन, आदित्य राय कपूर, संजय दत्त

छायांकन: विनोद प्रधान

: कहानी 1940 के दशक के हुसैनाबाद से जुड़ी हुई है|कैंसर से जूझ रही सत्या(सोनाक्षी सिन्हा) अपने पति देव (आदित्य राय कपूर) की शादी अपने परचित रूप (आलिया भट्ट) से करवाती हैं| राय सुहागरात के दिन रूप से कहता है तुम्हें इस घर में इज्जत तो मिलेगी लेकिन मेरा प्यार नहीं क्योकि प्यार मै सिर्फ अपनी पहली पत्नी से करता हूं|रूप बहार बेगम(माधुरी दीक्षित) से गाना सीखने उसके कोठे पर जाती है वहां उसकी मुलाकात हीरामंडी के पास के पास रहनेवाले एक लोहार जफर (अरुण धवन) से होता है फिर दोनों का प्रेम प्रसंग शुरू होता है लेकिन जफर रूप को ढाल बना कर अपने पुराने रंजिश का बदला लेना चाहता है क्योंकि जफर बहार बेगम और देव चौधरी के पिता बलवंत चौधरी का नाजायज औलाद है|कहानी में देश बटवारे को लेकर आपसी रंजिसे भी चल रही है अंत तक अब्दुल (कुणाल खेमू) दंगो का खूनी होली सुरू कर चुका होता है |कहानी बहुत उलझी हुई है स्पष्ट नही हो पाता है फ़िल्म का समय बहुत ज्यादा है पर कार्य बहुत धीमा है|कॉस्ट्यूम बहुत ही लाजवाब है अलिया और अरुण ने जबर्दस्त अभिनय किया इन्हीं दोनों के वजह से फ़िल्म जीवित रहा |आदित्य राय ने अपने खामोश अभिनय में रहने के बावजूद दमदार असर छोड़ा…

सोशल मीडिया अकाउंट को आधार से जोड़ने का याचिका दायर

फ़ेक न्यूज समाज में जिस तरह अपना प्रभाव जमा रहा है और रोक थाम का कोई खास असर नहीं हो रहा को देखते हुए कोर्ट में सोशल मीडिया अकाउंट को आधार से जोड़ने का याचिका दायर किया गया है|याचिका में सर्वोच्च अदालत से इस संबंध में केंद्र सरकार को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है|

याचिका दाखिल करने वाले वकील और भाजपा नेता अश्विनी उपध्यय का दावा है कि इस समय देश में 3.5 करोड़ ट्विटर अकाउंट और 32.5 करोड़ फेसबूक अकाउंट है सोशल मीडिया के जानकारों के मुताबिक इनमें से 10 फीसदी अकाउंट फर्जी हैं|याचिका में कहा गया है कि ट्विटर और फेसबुक पर नामचीन लोगों और बड़ी हस्तियों के नाम पर सैकड़ों फर्जी अकाउंट चल रहे हैं|संवैधानिक संस्थाओं के असली फोटो भी इन फर्जी अकाउंट के साथ लगे हैं|इस लिए आम आदमी इसपर जारी होने वाले खबरों को असली समझ कर भरोसा कर लेता है|याचिका में दावा किया गया है कि सोशल मीडिया के इन फर्जी अकाउंट पर जारी फर्जी खबरें मूलरूप से कई दंगों और हिंसक वरदातों के लिए जिम्मेदार है|इनके चलते देश में शांति और सौहार्द को खतरा पैदा हो गया है|इस लिए जरूरी है कि राजनीतिक दल और प्रत्‍याशी अपने प्रचार के लिए इन सोशल मीडिया अकाउंट का प्रयोग न करें|चुनाव के दौरान विपक्षी प्रत्याशी की छवि को खराब करने के लिए इन सोशल मीडिया का प्रयोग बखूबी से किया जाता है

जिंदगी एक तलाश

जिंदगी का फलसफा भी कितना अजीब है यारों पूरा जीवन सफर और सफर में कट जाता है फिर भी सफर अधूरा – अधूरा सा लगता है…

जिंदगी में कुछ ऐसे मीठी घटनाएं हो जाती है जिन्हें याद करना और दूसरे को बताने के सिवा और कोई दूसरा ऑप्शन नहीं रह जाता है बात उन दिनों की है जब मै इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन का कोर्स कर रहा था और पार्ट टाइम में कॉम्पिटिशन की तैयारी|एक दिन मैं दोस्तो के साथ बैठा था तभी मेरे फोन पर टिंग टाँग मैसेज की रिंग बजा मैंने देखा तो मेरा इंटेलिजेंस ब्यूरो की परीक्षा डेट आगया था दोस्तो को बताया तो उन्होंने एक्जाम अच्छा कर के आने को कहा और मै दो दिन पहले ही एक्जाम सेंटर के लिए निकलने की तैयारी करने लगा क्यों कि सेंटर राजस्थान के जयपुर शहर में था|मै पूरी तैयारी कर इलाहाबाद जंक्शन पर पहुचा ट्रेन रात 11:30 बजे जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस थी स्टेशन पर मैं बैठा था और ट्रेन आने की समय हो चला था तभी मेरे मन में एक खुरापाती आइडिया आया क्यों न बिना टिकट के यात्रा करू और फिर मैंने वैसा ही किया 10₹ का स्टेशन टिकट ले कर ट्रेन के जनरल बोगी में किसी तरह बैठ गया|

भारत के ट्रेनों में जनरल बोगी की हालत किसी छोटे बच्चे के उलझे हुए बालों में जूं खोजने के बराबर है ऎसा लगता है कि भारत की आधी जनसंख्या एक साथ जनरल बोगी में यात्रा करने पर आमत हो गई हो |ऎसा भीड़ देख मेरा तो सर चकराने लगा पर इतने उलझनों के बीच भी एक सज्जन व्यक्ति आँख बंद किए चेहरे पर हल्की मुस्कान के साथ किसी के यादों में खोया था मैं ये देख हैरान था और मैं इस राज को जानने को उत्सुक था पर पूछे तो पूछे कैसे आखिरकार फतेपुर पहुंचते पहुचते मैंने पूछ ही लिया तो उसने हंसते हुए बताया हाँ _मै अपने बीते दिनों को याद कर रहा था उसने जो कहानी बताई सच में रोमांचित कर देने वाली थी मै अपने तरीके से उस कहानी को पेश करता हूं… |

ये कहानी बनारस की एक लड़की (सुमन) की है जो पड़ोस के ही एक लड़के (विवेक) से प्रेम करती है जो एक सरकारी कर्मचारी हैं दोनों एक दूसरे को पसंद करते हैं शादी करना चाहते हैं विवेक थोड़ा चापलूस और खुद के कार्यो में व्यस्त रहने वाला टाइप का इंसान हैं सुमन को कभी कभी इसका व्यवहार बहुत अजीब लगता है पर वह उससे प्यार करती है सोचती शादी हो जाने पर वह सुधर जायेगा|विवेक सुमन को एक दिन रेस्तरां में डिनर के लिए बुलता है और सरप्राइज गिफ्ट में उसे कान की बाली देता है सुमन थोड़ा अपसेट हुई उसे लगा कि विवेक उसे शादी करने का प्रपोजल देगा|तभी विवेक के ऑफिस से जरूरी कॉल आ जाता है और चला जाता है सुमन वही बैठी उसके बारे में सोच रही है तभी सुमन का फोन बजता है

सुमन – हैलो

विवेक _ जानू मुझे ऑफिस के काम से जयपुर जाना पड़ेगा

सुमन _ कितने दिनों के लिए जा रहे हो

विवेक _ पंद्रह दिनों के लिए

विवेक जयपुर चला जाता है इधर सुमन उसके यादों में दिन भर खोई रहती हैं

तेरे बिना मैं ऎसे जिये जा रही हूँ

जैसे कोई गुनाह किये जा रही हूँ ||

तभी सुमन सोचती है कही ऎसा तो नहीं कि वह मुझसे शादी के बारे में बात करने में डरता हो क्यो न मैं ही उसे जयपुर जा कर उसे सरप्राइज करू और शादी करने के लिए कहूँ |सुमन समान पैक कर जयपुर के लिए ट्रेन से निकलती हैं ट्रेन इलाहाबाद जंक्शन पहुचती है सुमन खाने का सामान लेने ट्रेन से उतरती है स्टेशन से बाहर आती है और सामान लेती है तभी ट्रेन का हॉर्न बजता है वह दौडती है पर ट्रेन जा चुकी होती है और जयपुर के लिए वह आखरी ट्रेन थी और जाना जरूरी था स्टेशन के पास ही शुक्ला ट्रेवल एजेंसी है सुमन वहा जाकर जयपुर के लिए टैक्सी रिजर्व करती है ड्राइवर (हेमंत) एक बहुत ही सीधा और सुंदर स्मार्ट लड़का है उसकी मासूमियत भरे चेहरे और आँखों से लगता है मानों वर्षों से किसी के इंतजार मे तड़प रही हो|हेमंत गाड़ी लेकर आता है दोनों एक दूसरे को देखते रह जाते हैं मानो हजारों वर्षों से एक दूसरे को जानते हो लेकिन ये पल कुछ ही समय के लिए था

सुमन _गाड़ी देख कहती है ये गाड़ी तो अपनी आखिरी सांसे ले रही है ये जयपुर तक पहुंच पायेगी

हेमंत _हंसते हुए कहता बूढे इंसानों के केवल शरीर बूढ़ी होती है उनकी इरादे और हौसले नही दोनों हंसी मजाक के साथ जा रहे होते हैं तभी उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है और एसे जगह होता है जहां दूर दूर तक किसी इंसान का नामो निशान नही होता है इनके साथ ऎसा होना एक अजीब बात है मानो कुदरत खुद चाहता हो की ये एक दूसरे के नजदीक आए|पैदल चलते वक्त सुमन अपने बॉयफ्रेंड के बारे में हेमंत को बताती हैं की वह विवेक को प्रपोज करने जा रही है शादी करने के लिए, हेमंत जोर से हँसता है और कहता है कि क्या शादी, शादी की बात विवेक ने की तुमसे

सुमन _नहीं

हेमंत _तब तो तुम गई काम से वो शादी तुमसे करना नही चाहता और तुम उसे शादी करने के लिए फसा रही हो

सुमन _तुम चुप रहो हम एक दूसरे से प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैंतभी एक घर दिखता है वहा जाकर मदद मांगते हैं घर का मलिक बोलता है कि कल सुबह पास के बस स्टैंड से एक बस जाती है वहां से जा सकते हो अगर तुम लोग रात को यहां रुकना चाहो तो रुक सकते हो सुबह चले जाना दोनों वही रात को रोकने की प्लानिंग करते हैं मकान मालिक उन्हें रूम दिखाता है और खाने के लिए पूछता है क्या खाओगे तब वो दोनों कहते हैं कि अगर आप बुरा न माने तो रात खाना हम अपने हाथों से बनाए

मकान मालिक _ आप लोग हमारे मेहमान हैं मेहमानों से काम नहीं करवाते

हेमंत _ चाचा जी आप ने रात को हमे इस अनजाने शहर में रुकने दिया यही बहुत है खाना तो हमी बनाएँगे बस आप बता दी जिए बाजार कहा लगता है यहाँ पर

सुमन और हेमंत दोनों पास के ही गांव के बाजार में जाते हैं| डूबते सूरज की रोशनी में गांव की इतिहास की गुनगुने यादों की ठंडी सांसो की आवाज में जब किसान दिल के लहरों से उठी आवाज से चिल्लाता है बैगन ले लो कद्दू ले लो दस रुपए में दो किलो गाजर – दस रुपए में दो किलो गाजर वह एक अद्भुत पल होता है|इंसानो के प्रति कुदरत की यह ममतामई कल्पना अद्भुत है सुमन को गांव के इस रंग को देख कर इतनी खुशी मिली मानो यह इसकी पहली और आखिरी खुशी हो|हेमंत सुमन को इतना खुश देख उसे एक टक देखता रहा सुमन भी उसे एक टक देखती रही मानो दोनों आंखो आंखो से अपने दिल के दर्द को एक दूसरे को बता रहे हो तभी पास के एक दुकान पर रेडियो पर गाना बजता है

‘इश्क जब एक तरफ हो तो सजा देता है इश्क जब दोनों तरफ हो तब मज़ा देता है

“तभी एक व्यक्ति कहता है भईया थोड़ा बगल(साइड) हो जाइये तब दोनों अपने सपनों से बाहर आते हैं सुमन कहती हैं हम लोग लेट हो रहे हैं जल्दी चलना चाहिए

हेमंत _है चाचा जी हमारी राह देख रहे होंगे

खाना बनता है सब खाते हैं| सुबह जयपुर निकलने के लिए बस स्टैंड जाते हैं बस आती है सुमन कहती हैं अब यहां तक आए ही हो तो जयपुर तक मेरे साथ चलो तभी मैं तुम्हारे टैक्सी का पैसा दूँगी सुमन विवेक को फोन कर जयपुर बस स्टैंड आने के लिए कहती हैं जयपुर पहुंचने पर सुमन को अब कोई खुशी नहीं होती दोनों एक दूसरे को बस देखे जा रहे थे तभी विवेक आता है सुमन तुम यहाँ मुझे तो सरप्राइज कर दी

सुमन _ हाँ

सुमन के चेहरे पर बनावटी मुस्कान साफ दिख रहा था अब वह खुशी नही थी जो घर से निकलने के पहले था सुमन हेमंत का परिचय करवाती है विवेक से और कहती हैं इन्होने मेरी बहुत मदद की |विवेक हेमंत का शुक्रिया अदा करता है सुमन की मदद के लिये फिर विवेक सुमन बात करने लगते हैं दोनों को बात करते देख हेमंत के दिल में एक अजीब से दर्द उठा सुमन को साथ ले कर कही दूर चला जाए पर यह संभव नहीं है हेमंत टैक्सी का पैसा लिए वगैर इलाहाबाद के लिए निकल देता है| हेमंत को इस तरह चले जाना, सुमन को बहुत तकलीफ होता है|विवेक और सुमन रूम पर जाते हैं, सुमन का इस तरह आना और शादी के लिए कहना विवेक को अच्छा नहीं लगता वह शक के निगाहों से देखता है और अपने कार्यो को ज्यादा अहमियत देता है शादी के लिए मना कर देता है सुमन को इसकी बात थोड़ी अजीब लगी पर सुमन भी ऎसे इंसान से शादी नहीं करना चाहती है जो प्रेम के बजाए आपने काम को अधिक अहमियत दे|सुमन वहां से चली जाती है

हेमंत ट्रैवल एजेंसी के ऑफिस में बैठा है रेडियो पर मुहमद हुसैन साहब का गाना बज रहा है

‘दो जवां दिलों का गम दूरियां समझती है कौन याद करता है हिचकियां समझती है|

हेमंत जबसे जयपुर से आया है रातो की नीद और दिन की चैन उड़े हुए हैं किसी से बात नहीं करता है हमेशा गुमसुम बैठा रहता है मानों कोई चीज खो गई हो|तभी बाहर से एक आवाज आती हेमंत भाईय हेमंत भाईय

हेमंत _ काहे चिल्लाये जा रहे हो बे

छोटा लड़का _बाहर कोई आया है आप को दूढ़ रहा हैं

हेमंत _दूढ़ रहा है मुझे कोइन है बे

हेमंत अचंभित था उसे अपने आखों पर विश्वास नहीं हो रहा था सामने सुमन खड़ी थी|सुमन _बाहर से ही हेमंत मुझसे शादी करोगे सुमन _हंसते हुए जल्दी बताओ नही तो मेरी ट्रेन छूट जायेगी तो फिर तुम्हें छोड़ना पड़ेगा

हेमंत _ क्या हकलाते हुए हाँ हाँ नहीं हाँ हाँ

दोनों एक दूसरे को गले लगा लेते मानो बहुत दिनों के बाद मिले हो|हेमंत सुमन को इलाहाबाद का सनसेट दिखाने के लिए ले जाता है और फ़िल्मी स्टाइल में गुटनो पर बैठ कर सुमन को शादी के लिए प्रपोज करता है..

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आहट आतंक की

आतंकवाद_ आतंकवाद कोमा में पड़े बीमार व्यक्ति की तरह है जिसपर रोक थाम का कोई असर नहीं पड़ता है क्योंकि चीन जैसे देश पाकिस्तान के गर्भ में पल रहे अजहर महमूद, हाफिज सईद जैसे खतरनाक आतंकवादियों को बढ़ावा देने वाले लोग और देश शामिल हैं|आतंकवाद अपनी मौजूदगी किसी न किसी रूप में दिखाता रहा है आतंकवाद नामक फंगस ने श्रीलंका जैसे छोटे देश को भी नहीं बख्शा जो अपनी ही राजनीतिक उठापटक से त्रस्त है और अपने पैरों पर खड़ा होने की कोशिश कर रहा है|

श्रीलंका में हुये भीषण आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को हिला दिया है|तीन चर्च और इतने ही होटलों के साथ कुछ और स्थानों को निशाना बनाकर किए गए आतंकी हमले में तीन सौ से अधिक लोग मारे गए और उतने ही घायल हुए|यह एक सोची समझी चाल थी जिसे एक एक कर के अंजाम दिया गया अर्थात चर्च में ईस्टर की विशेष प्रार्थना के दौरान निशहाय लोगों पर हमला और अंतराष्ट्रीय पर्यतक से भरे रहनेवाले होटलो पर हमला| अखिरकार आतंकवाद का एक और क्रूरता भरा मनशूबा कामयाब रहा

श्रीलंका में हुये आतंकी हमले से देश को सबक सीखना चाहिए और भारत को खासकर, भारत को 1993 और 2008 का वह मनहूस काल भूलना नहीं चाहिए क्योंकि आतंकी भारत में आए दिन नापाक हरकत को अंजाम देने के फिराक में रहता है… 🚶‍♂️

गर्मी और प्रचार की गर्मी

राजस्थान में मौसम के साथ ही अब प्रचार की गर्मी भी बढ़ती दिख रही है दो चरणों में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री मंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जैसे स्टार प्रचारकों के दौर शुरू होने के साथ ही अब राजस्थान भी लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी दिखाने की तैयारी में है

राजस्थान में लोकसभा की 25 सीटें हैं और इनमें से 13 सीटों के लिए 29 अप्रैल को तथा 12 सीटों के लिए 6 मई को मतदान होना है
नामांकन की प्रक्रिया दोनों चरणों के लिए पूरी हो चुकी है और चुनावी चौसर पूरी तरह बीछ चुकी है प्रत्याशियों ने प्रचार शुरू तो कर दिया है और आम मतदाता भी अब चुनावी चर्चा करता देखा जा सकता है रविवार और सोमवार को प्रधानमंत्री की 4 बड़ी सभाओं ने यहां प्रचार की गर्मी बढ़ा दी अपनी पहली सभाओं में ही उन्होंने पाकिस्तान को चुनौती देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बना दिया इसके साथ राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद किसान कर्ज माफी जैसे मामलों में वादाखिलाफी की भी पुरजोर ढंग से उठाया प्रधानमंत्री के 2 दिन के दौरे के बाद अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राजस्थान में अपनी पहली बड़ी सभा करेंगे और माना जा रहा ह कि इस सभा के बाद राजस्थान में प्रचार की गर्मी अपना पूरा असर दिखाने लगेगी क्योंकि इसके साथ ही अब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह वह दोनों दलों के स्टार प्रचारकों के दौर भी शुरू हो जाएंगे कांग्रेस यहां प्रियंका गांधी के 2 रोड शो कराने की तैयारी कर रही है राजस्थान में फिलहाल रैलियां अधिक में स्थानीय मुद्दे ही छाए हुए हैं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और कांग्रेस के अन्य नेता जहां राज्य सरकार की ओर से पिछले 4 माह में किए गए निर्णय को जिक्र करते नजर आ रहे हैं वहीं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी और अन्य नेता किसान कर्ज माफी, बेरोजगारी भत्ते के भुगतान जैसे वादे पूरे नहीं के आरोप लगाते देख रहे हैं |

गुमनाम होते रिश्ते

कितने दिन बीत गए उनसे बाते किए हुये अब तो अकेले जीने की लत सी लग गई है

आज के भाग दौड़ भरे जीवन में लोग इतने व्यस्त हो गए हैं कि रिश्तों के लिए कोई अहमियत ही नहीं रहा (रिश्तों में आजादी ही रिश्तों की कहानी है) सुबह होते ही सब अपने- अपने दप्तरो के लिए निकल देते हैं

जिंदगी में जो भी वक्त बचा है वो ट्रेफिक जाम में बचा है, एफ एम रेडियो पर जब 90 की दशक के गाने बजते हैं तो कुछ पल के लिए उन्हें अपनों को याद करने को मानो मजबूर कर देती हैं पर सकून कहा बैरी रेडियो की डरावने ऐडवेर्टी्‍स और पीछे खड़ी गाड़ियों की लंबी कतारों की हॉर्न उन लम्हों को छीन लेती है, अब फिर से वही काम काम और बॉस की खुशअमीदी करना रह जाता है बस इसी भाग दौड़ में जीवन गुजर जाता है

रिश्ते उन गुमनाम शांत पहाड़ों की तरह हो गई है जब तक उन्हें आवाज न दो उधर से कोई आवाज ही नहीं आती |

गौरक्षा राजनीतिक मुद्दों से बाहर

पिछले कुछ वर्षों में गौ माता बहुत चर्चा में रही है |कई बार यह राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बना और सरकार की तरफ से दावा भी खूब किया गया कि गोरक्षा को लेकर क्या क्या कदम उठाए गए|कामधेनु आयोग का गठन भी किया गया जिसके बारे में पता चला कि यह गो सेवा का सबसे बड़ा अभियान था लेकिन सरकारी बाबुओं की सुस्ती का आलम यह है कि पाँच वर्ष बीत जाने और और आम चुनाव की घोषणा हो जाने के बाद, गो रक्षा के नाम पर सहनभूति प्राप्त करने के बाद उन्हे उन्ही के हाल पर फिर छोड़ दिया गया

क्या ईवीएम इस बार भी दे पाएगा पवित्रता का सबूत

आम चुनाव इस समय पूरे देश में तहलका मचाए हुए हैं|प्रत्येक उम्मीदवार अपने विजय के लिए साम, दाम, दण्ड, भेद हर प्रकार के तरीके अपना रहे है|लेकिन इन सब के बीच में दो लोग बहुत ही ज्यादा भयभीत है पहले कांग्रेस जिसे हार का भय सता रहा है और दूसरी है ईवीएम जिसे अपनी पवित्रता का डर सता रहा है कि कहीं फिर से तो उसे चरित्रहीन घोषित नहीं किया जाएगा|क्योकि विपक्ष की हार ईवीएम को ईमानदार और निष्पक्ष चुनाव न कराने का आरोपी मानेगी उसकी कर्मठता पर एक बार फिर से चारित्रहीन होने का लांछन झेलना पड़ेगा|राजनीति के इस महा युद्ध के बीच में फंसी ईवीएम अपनी सत्ययता कैसे साबित करे|हालांकि ईवीएम बार-बार अपनी अग्नि परीक्षा का परिचय दे चुकी है परंतु विपक्षी नेता अपनी हार का ढ़ीढोरा फिर से ईवीएम पर ही फोड़एंगे|इस बार यह कह पाना बहुत ही मुश्किल है कि ईवीएम अपने चरित्र को किस प्रकार से बचाती है…

लोक तंत्र का महापर्व

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 325 एवं 326 के अनुसार देश में 18 वर्ष की आयु या उससे अधिक के लोगों को मतदान करने का अधिकार मिला है|मतदान लोकतंत्र का महापर्व होता है जिसमें सभी मतदाता अपने कीमती मत का दान कर के देश के प्रतिनिधि चुन सकता है|हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह मतदान करने जाएं क्योकि हमारा मत ही देश का भविष्य तय करता है |जैसे जैसे देश की जन संख्या बढ़ रहा है वैसे ही मतदाताओं की संख्या भी बढ़ रही है |जिससे मतदान प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है कितने दुख की बात है कुछ लोग मतदान करना जरूरी नहीं समझते और कम जोर सरकार आ जाती है