फ़ेक न्यूज समाज में जिस तरह अपना प्रभाव जमा रहा है और रोक थाम का कोई खास असर नहीं हो रहा को देखते हुए कोर्ट में सोशल मीडिया अकाउंट को आधार से जोड़ने का याचिका दायर किया गया है|याचिका में सर्वोच्च अदालत से इस संबंध में केंद्र सरकार को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है|
याचिका दाखिल करने वाले वकील और भाजपा नेता अश्विनी उपध्यय का दावा है कि इस समय देश में 3.5 करोड़ ट्विटर अकाउंट और 32.5 करोड़ फेसबूक अकाउंट है सोशल मीडिया के जानकारों के मुताबिक इनमें से 10 फीसदी अकाउंट फर्जी हैं|याचिका में कहा गया है कि ट्विटर और फेसबुक पर नामचीन लोगों और बड़ी हस्तियों के नाम पर सैकड़ों फर्जी अकाउंट चल रहे हैं|संवैधानिक संस्थाओं के असली फोटो भी इन फर्जी अकाउंट के साथ लगे हैं|इस लिए आम आदमी इसपर जारी होने वाले खबरों को असली समझ कर भरोसा कर लेता है|याचिका में दावा किया गया है कि सोशल मीडिया के इन फर्जी अकाउंट पर जारी फर्जी खबरें मूलरूप से कई दंगों और हिंसक वरदातों के लिए जिम्मेदार है|इनके चलते देश में शांति और सौहार्द को खतरा पैदा हो गया है|इस लिए जरूरी है कि राजनीतिक दल और प्रत्याशी अपने प्रचार के लिए इन सोशल मीडिया अकाउंट का प्रयोग न करें|चुनाव के दौरान विपक्षी प्रत्याशी की छवि को खराब करने के लिए इन सोशल मीडिया का प्रयोग बखूबी से किया जाता है