गुमनाम होते रिश्ते

कितने दिन बीत गए उनसे बाते किए हुये अब तो अकेले जीने की लत सी लग गई है

आज के भाग दौड़ भरे जीवन में लोग इतने व्यस्त हो गए हैं कि रिश्तों के लिए कोई अहमियत ही नहीं रहा (रिश्तों में आजादी ही रिश्तों की कहानी है) सुबह होते ही सब अपने- अपने दप्तरो के लिए निकल देते हैं

जिंदगी में जो भी वक्त बचा है वो ट्रेफिक जाम में बचा है, एफ एम रेडियो पर जब 90 की दशक के गाने बजते हैं तो कुछ पल के लिए उन्हें अपनों को याद करने को मानो मजबूर कर देती हैं पर सकून कहा बैरी रेडियो की डरावने ऐडवेर्टी्‍स और पीछे खड़ी गाड़ियों की लंबी कतारों की हॉर्न उन लम्हों को छीन लेती है, अब फिर से वही काम काम और बॉस की खुशअमीदी करना रह जाता है बस इसी भाग दौड़ में जीवन गुजर जाता है

रिश्ते उन गुमनाम शांत पहाड़ों की तरह हो गई है जब तक उन्हें आवाज न दो उधर से कोई आवाज ही नहीं आती |

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