
आम चुनाव इस समय पूरे देश में तहलका मचाए हुए हैं|प्रत्येक उम्मीदवार अपने विजय के लिए साम, दाम, दण्ड, भेद हर प्रकार के तरीके अपना रहे है|लेकिन इन सब के बीच में दो लोग बहुत ही ज्यादा भयभीत है पहले कांग्रेस जिसे हार का भय सता रहा है और दूसरी है ईवीएम जिसे अपनी पवित्रता का डर सता रहा है कि कहीं फिर से तो उसे चरित्रहीन घोषित नहीं किया जाएगा|क्योकि विपक्ष की हार ईवीएम को ईमानदार और निष्पक्ष चुनाव न कराने का आरोपी मानेगी उसकी कर्मठता पर एक बार फिर से चारित्रहीन होने का लांछन झेलना पड़ेगा|राजनीति के इस महा युद्ध के बीच में फंसी ईवीएम अपनी सत्ययता कैसे साबित करे|हालांकि ईवीएम बार-बार अपनी अग्नि परीक्षा का परिचय दे चुकी है परंतु विपक्षी नेता अपनी हार का ढ़ीढोरा फिर से ईवीएम पर ही फोड़एंगे|इस बार यह कह पाना बहुत ही मुश्किल है कि ईवीएम अपने चरित्र को किस प्रकार से बचाती है…